बांस में प्लास्टिक का विकल्प बनने की क्षमताः ADC

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DNN ऊना
16 जुलाई। बांस से निर्मित होने वाले उत्पादों की मार्केटिंग पर आधारित कार्यशाला का  डीआरडीए सभागार में आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने की। कार्यशाला नाबार्ड और डीआरडीए ऊना के संयुक्त तत्वावधान चलाई जा रही समर्थ ऊना योजना के तहत आयोजित की गई। कार्यशाला में लमलैहड़ी व धगड़ूंह से आए लगभग 40 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर एडीसी ने कहा कि बांस से बने उत्पादों में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। बांस उत्पादों का विक्रय कर ग्रामीण क्षेत्रों की आमदनी में इजाफा हो सकता है। उन्होंने कहा कि बांस से बने उत्पादों की मांग बाजार में बड़ी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बांस में प्लास्टिक का विकल्प बनने की क्षमता है, इसलिए हमें स्वंय सहायता समूहों के माध्यम से बनाए गए बांस के उत्पादों को मार्केट देना आवश्यक है, जिसके लिए जिला प्रशासन प्रयासरत है।
कार्यशाला में पुणे से आए बेंबू इंडिया के योगेश शिंदे ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लाभार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। शिंदे ने कहा कि हिमाचल में बांस का उत्पादन काफी मात्रा में होता है तथा यहां इसके उत्पाद निर्मित करके स्वरोजगार की अपार संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। बांस से ऐसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जो प्लास्टिक को रिप्लेस कर सकते हैं।
प्रतिभागियों को योगेश शिंदे ने बताया कि पूरी दुनिया में पॉलीथीन के बाद टूथब्रश बनाने में सबसे ज्यादा प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है और प्लास्टिक की रिसाइकलिंग आसान नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने बांस से टूथब्रश बनाकर मार्केट में उतारा, जिसको अच्छा रिस्पांस मिला। उन्होंने कहा कि बांस के उत्पाद इको फ्रैंडली होते हैं, इनके पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है।
कार्यशाला में पीओ डीआरडीए संजीव ठाकुर, नाबार्ड के डीडीएम अरुण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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