उन्होंने बताया कि कुल्लू जिला के समस्त पशु चिकित्सा अधिकारियों को बर्ड फलू की निगरानी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है एवं जो अधिकारी व कर्मचारी अवकाश पर थे उनके अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमें अपने-अपने क्षेत्र में नदी किनारों, झीलों के आसपास, चिकन की दुकानों तथा मुर्गी पालकों के घर-द्वार पर जाकर निरीक्षण व जांच कर रहे हैं ताकि बर्ड फलू सम्बन्धी लक्षणों का समय रहते पता लगाया जा सके एवं उसके निवारण हेतू उचित कदम उठाए जा सके।
इसके अतिरिक्त गठित टीमें बर्ड फलू के लक्षणों के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रही है एवं आवश्यक जानकारी दे रही हैं। इसी कड़ी में पशुपालन विभाग ने उपमण्डल कुल्लू के तहत आने वाली विभिन्न चिकन शाॅप व मुर्गी पालकों के घर-द्वार से मुर्गियों के साठ सैम्पल लिए हैं जिन्हेंजांच हेतू क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला जालंधर भेजा गया है। भविष्य में भी नियमित रूप से प्रोटोकाॅल के अनुसार मुर्गियों के सैम्पल जांच हेतू प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग, वन विभाग एवं वन्य जीव प्राणी विभाग के साथ मिलकर पक्षियों की स्थिति पर प्रतिदिन निगरानी कर रहा है। पशुपालन विभाग कुल्लू ने लोगों से अपील की है कि किसी भी क्षेत्र में पक्षियों व मुर्गियों के बहुत संख्या में बीमार या मृत पाए जाने पर तुरंत पशुपालन विभाग को तुरंत कार्यालय दूरभाष संख्या-01902-22553 पर सूचित करें। स्थानीय मुर्गी पालकों से अपील है कि वे बर्ड फलू से बचाव हेतू मुर्गियों को खुले में न छोड़ें ताकि वे प्रवासी या जंगली पक्षियों तथा खासकर उनके मल के सम्पर्क में न आ पाएं। फार्म व बाड़े को निरंतर साफ करें व कीटाणुनाशक घोल या चूने का छिड़काव करें। फार्म व बाड़े में जाने के लिए अलग जूते व कपड़ों का प्रयोग करें। फार्म व बाड़े में चूहों व नेवलों का प्रवेश न हो। बाड़े के प्रवेश द्वार पर कीटाणुनाशक घोल या चूने का इस्तेमाल करें। फार्म या बाड़े के आस-पास पेड़ की टहनियों व झाड़ियों को काट दें ताकि प्रवासी या जंगली पक्षी वहां पर न बैठें। पक्षियों/मुर्गियों द्वारा दाना छोड़ देना, अचानक मृत्यु होना, सिर आंखों कलगी व पांवों मे सूजन आना, कलगी के रंग में बदलाव आना, नाक बहना, खांसना-छींकना व दस्त लगने जैसे लक्षण आने पर तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सालय में सूचित करें।
उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग कुल्लू कई वर्षों से नियमित रूप से मुर्गियों के सैम्पल जांच के लिए प्रयोगशाला को भेजता रहा है तथा अभी तक जिला कुल्लू में बर्ड फलू का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। मनुष्यों के बर्ड फलू के विषाणु से संक्रमित होने की दर बहुत कम है। चिकन व अण्डों को अच्छी तरह से उबालने व पकाने पर बर्ड फलू का बिषाणु नष्ट हो जाता है इसलिए आम जनमानस को घबराने की आवश्यकता नहीं है।















