DNN मंडी
11 जुलाई । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार भारद्वाज ने कहा कि बरसात के मौसम में जल जनित, जन्तुओं के काटने व कीट जनित रोगों का प्रकोप बढ़ने की सम्भावना रहती है, जिसके फलस्वरूप इस मौसम के दौरान लोगों को अधिक सजग रहने की आवश्यकता होती है। उन्होंने इस बावत जिले भर के समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को इन सभी रोगों के उचित प्रबंधन के दिशा- निर्देश जारी किये हैं।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में आम तौर पर उल्टी-दस्त, पीलिया, बुनियादी बुखार इत्यादि नागरिकों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। इससे बचाव हेतु सभी को व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ पेयजल, स्वच्छ व ताजे भोज्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। उल्टी-दस्त होने पर तुरंत ओ.आर.एस. का घोल एक लीटर साफ पानी में लेकर इसका सेवन करना चाहिए ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस मौसम में सर्पदंश के मामले में एकाएक वृद्धि होती है, जिसके बचाव हेतु घास व खेतों में काम करते समय सुरक्षित जूते पहनें, घरों में होने वाली सर्पदंश के मामलों में कमी हेतू सजगता के साथ सफाई रखें व जन्तुओं के प्रवेश वाली जगहों को समय समय पर बंद करते रहें। अगर सर्पदंश की घटना हो जाये तो पीड़ित को शांत रखें तथा बिना समय बर्बाद किये नजदीक के चिकित्सालय में चिकित्सा उपचार करवायें।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में कीट जनित रोग, मलेरिया, डेंगू व स्क्रब टायफस के मामले बढ़ जाते है जिनके बचाव के लिए घरों के आसपास सफाई, पानी जमा होने वाले स्थानों को समतल करें, जिन पात्रों में पानी संग्रहण की संभावना होती है उसे खाली करें, मच्छर निरोधक उपकरणों का प्रयोग करें। सम्पूर्ण तन ढकने वाले कपड़े पहनें, तेज व शरीर दर्द के साथ बुखार आने की स्थिति मे चिकित्सा उपचार लेना सुनिश्चित करें। यह स्क्रब टायफस का लक्षण हो सकता जिसका समय पर उपचार न हो तो जटिलता हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अत्याधिक वर्षा होने व बाढ़ आने की स्थिति में पेयजल स्रोतों के प्रदूषित होने की संभावना बढ़ जाती है, अनावश्यक गाद व संग्रहित कचरा व जल मक्खी मच्छरों के पनपने के लिए उपयुक्त स्थान बन जाता है तथा घास व झाड़ियों की बढ़ोतरी सांप व अन्य जन्तुओं के छिपने की उपयुक्त जगह बन जाती है।
उन्होंने सभी लोगों से बरसात के मौसम के दौरान सजग रह कर अपने व अपने परिवार को स्वस्थ रखने का आग्रह किया है ।















