फूलों की खेती से बनी महोग की पहचान, इसेजानने के लिए दिल्ली से आए मेहमान

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DNN कंडाघाट (लवली)

देश में नहीं विश्व भर में फूलों की खेती के लिए पहचान बना चुका कंडाघाट विकास खंड की झाझा ग्राम पंचायत कामहोग गांव इंडियन इकोनोमिक सर्विस (आई.ई.एस.) के ट्रेनीज के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। हिप्पा शिमला में 6 दिन की ट्रेनिंग के लिए आए आईईएस. 2018 बैच के टे्रनी भी फूलों की खेती से मजबूत इस गांव की आर्थिकी को जानने के लिए महोग गांव में पहुंचे। उन्होंने गांव में जाकर किसानों से बातचित कर फूलों के खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की। कंडाघाट विकास खंड की कनिष्ठ अभियंता सुलक्षणा , ग्राम पंचायत झाझा के प्रधान मान सिंह, सचिव तारादत्त, नम्बरदार आत्म स्वरूप ने उनकी अगुवानी की और महोग में फूलों कीखेती के बारे विस्तार से जानकारी दी। आईईएस का यह दल यह जानने का बहुत उत्सुक था कि छोटा सा यह गांव फूलों की खेती के लिए कैसे प्रोहत्साहित हुआ। वहां पर मौजूद किसानों ने बताया कि यहां का मौसम फूलो की खेती के लिए बहुत ही अनुकूल था। पहले कम स्तर पर इसका उत्पादनशुरू किया गया जब मुनाफा अच्छा हुआ और यहां के फूलों की देश भर में मांग बढऩे लगी तो धीरे – धीरे उत्पादन को बढ़ाया गया।

इस अवसर पर उनके साथ हिप्पा के संकाय सदस्य रविन्द्र धीमान थे। इस दल में जतिन किशोर, ईशा बराक, अरुणा अरोड़ा, दीक्षा सुप्याल बिष्ट, सौरभ भार्गव, कुमार शुभम, अभिषेक पलासिया, सुषमा यादव, जेंदेन लिंगजेरपा  व मुनेश सूद शामिल थे। हिप्पा के संकाय सदस्य रविन्द्र धीमान ने बताया कि आईईएस का यह दल महोग में फूलों की खेती से मजबूत हुई गांवकी आर्थिकी के बाद वीरवार का तातापानी में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का दौरा करेगा। विकास खंड कंडाघाट की कनिष्ठ अभियंता सुलक्षणा ने बताया कि आई.ई.एस. 2018 बैच के दस सदस्यीय दल ने बुधवार कोमहोग गांव का दौरा किया । फूलों की खेतीसे कैसे किसाान आर्थिक रूप से समृद्ध हुए इसे जानकारी को हासिल किया।

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