प्रदेश सहित देशभर के 61 छावनी परिषदों को भंग करने के आदेश, यह है कारण

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DNN कसौली/सोलन ब्यूरो (आदित्य सोफत)

08 फरवरी। हिमाचल प्रदेश सहित देशभर के 61 छावनी परिषद को भंग करने के आदेश जारी हो गए है। दस फरवरी को यह छावनी परिषद भंग हो जाएंगे। जानकारी के अनुसार रक्षा मंत्रालय के रक्षा सम्पदा भवन के कार्यालय के तहत एक फरवरी को सहायक डीजी (कैन्ट) के पत्र के अनुसार छावनी बोर्ड को भंग करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेशों के अनुसार दस फरवरी को चुने हुए बोर्ड सदस्य का अंतिम दिन होगा। बताया जा रहा है कि अब बोर्ड के भंग होने के बाद अगामी एक वर्ष के लिए नॉमिनेट मैंबर की नियुक्ति की जाएगी।
गौरतलब है कि छावनी परिषदो में होने वाले चुनाव का कार्यकाल दस फरवरी 2021 को खत्म हो रहा है। यह कार्यकाल कोरोना काल के बीच दस अगस्त को छह माह के लिए बढ़ाया। छावनी परिषदों के चुनावों को दो बार स्थगित कर कार्यकाल बढाया जा चुका है।

यह है पूरा मामला
छावनी परिषदों में वर्तमान समय मे चुने गए प्रतिनिधियों का कार्यकाल 10 फरवरी 2020 को खत्म होने जा रहा था। इसके अनुसार 11 फरवरी 2020 को देश भर की छावनी परिषदों मे नई परिषद को बिठाया जाना था। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से 05 फरवरी 2020 को इनका कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ाया था, लेकिन कोरोना के चलते यहां पर चुनाव नहीं हो पाए। इसके पश्चात फिर भारत सरकार की और से इनका कार्यकाल 10 अगस्त 2020 से छह माह के लिए बढ़ाया गया। छावनी परिषदों में अभी तक फिर चुनावी घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, एक दो बार चुनाव को लेकर संशय बना था। वर्तमान स्थिति के अनुसार अब छावनी परिषदों को भंग करने के आदेश जारी हुए है।
यह अधिसूचना एक फरवरी को रक्षा मंत्रालय के डीजी कार्यालय से जारी हुई। अधिसुचना जारी होने के बाद चुनाव न करवाकर बोर्ड को भंग करने के आदेश जारी कर दिए गये है।

प्रदेश में है दर्जन छावनी बोर्ड
बता दें कि देशभर 61 क्षेत्र छावनी क्षेत्र के अधीन आते है। हिमाचल प्रदेश में सात सैन्य क्षेत्र छावनी बोर्ड के अधीन आते थे, लेकिन योल को छावनी बोर्ड से मुक्ति के बाद छह सैन्य क्षेत्र डगशाई, कसौली, सुबाथू, चंबा, जतोग व डलहौजी छावनी बाद के अधीन है। यहां पर भी अब एक सदस्य को नॉमिनेट किया जाना है।

क्या कहना है छावनी वैलफेयर एसोसिएशन का
प्रदेश छावनी वैलफेयर एसोसियेशन राजकुमार सिंगला ने कहा कि छावनी नियमों के अनुसार चुनावों को एक वर्ष में दो बार स्थगित होने के बाद छावनी बोर्ड को भंग करके आदेश जारी हुए है। जारी आदेशों के अनुसार अब अगामी एक वर्ष के लिए एक नॉमिनेट मैंबर नियुक्त किया जा सकता है।

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