पीडीएस में दालों की खरीद में भारी धांधली : राणा

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DNN सोलन

11 मई । सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दी जानी वाली गरीब की दाल को बीजेपी सरकार और सिस्टम ने लूट का जरिया बना डाला है। यह बात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र राणा ने सोलन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। राणा ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली जो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में शुरू की गई थी। गरीब के लिए जारी हुई इस योजना पर भी बीजेपी की बुरी नीयत व निगाह का साया मंडराया है। राणा ने खुलासा किया कि 2019 में सरकार ने चुपके से यह फैसला ले लिया कि नेशनल कंज्यूमर कॉपरेटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया के जरिए इन दालों की खरीद होगी। हालांकि उक्त फर्म की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से सांठ-गांठ की चर्चाओं के बीच मात्र 3 दिनों में इस फैसले में टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से यह दालें देने शुरू की हैं जिसमें हर महीने करीब 50 करोड़ की दालों की खरीद होती है। एनसीसीई न तो दाल उत्पादक है न ही इनका दालों का कोई कारोबार है। बस बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बरदहस्त के चलते तमाम नियमों को ताक पर रखकर इस फर्म को प्रदेश में गरीब के लिए सप्लाई होने वाली दालों का टेंडर तीन दिनों के नोटिस पर दे दिया। इसी के साथ दाल के पैकेट बनाने वाली 6 कंपनियों को इन दालों की पैकिंग का काम भी अलग से सौंपा गया है। जो कि प्रदेश में हर महीने 50 लाख दाल के पैकेट बनाकर भेज रही है। इन दालों की क्वालिटी में लगातार कम्प्रोमाइज किया जा रहा है। जिस कारण से गरीब की सेवा साधना के लिए कांग्रेस के द्वारा शुरू की गई यह स्कीम अब बीजेपी के राज में गरीब की जेब पर भारी साबित हो रही है। राणा ने खुलासा किया कि इस मामले में बीजेपी से ही संबधित पालमपुर स्थित किसी कन्सलटेंट के माध्यम से दिल्ली स्थित फर्म के साथ यह डील करवाई गई है। राणा ने कहा कि नियमानुसार दालों की सप्लाई का ग्लोबल टेंडर होना जरूरी है और कांग्रेस कार्यकाल में जब यह योजना शुरू की गई थी तब इसके ग्लोबल टेंडर होते थे। लेकिन बीजेपी ने टेंडर प्रक्रिया को ही खत्म करके 3 दिन के नोटिस पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सप्लायर को यह सप्लाई दी है। उन्होंने कहा कि अगर इन दालों की खुले बाजार से टेंडर के माध्यम से खरीद की जाती तो 5 रुपए सस्ती मिल सकती थी लेकिन बीजेपी सरकार ने ऐसा न करके 50 लाख दाल के पैकटों पर करीब अढाई करोड़ रुपए का अनावश्यक खर्चा लादा है। अब सवाल यह उठता है कि सरकारी संरक्षण में चली इस लूट का हिस्सा किस-किस की जेब में और कितना-कितना जाता है, बीजेपी को जनता को यह बताना होगा। राणा ने सवाल खड़ा किया है कि हिमाचली या अन्य प्रांतों की फर्मों को नजरअंदाज करके ऐसे कौन से कारण थे कि दिल्ली की फर्म को यह सप्लाई दी है। यह भी सरकार को बताना होगा। अब गरीब की दाल के इस खेल को कमाई का जरिया बना चुकी बीजेपी को बताना होगा कि गरीब के नाम पर यह लूट किसको लाभ देने के लिए की जा रही है।
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राणा ने पुलिस भर्ती के स्कैम पर बात करते हुए कहा कि पुलिस भर्ती मामले में एफआईआर 3 दिन किस कारण और किस दबाव के कारण लेट हुई है, सरकार बताए। उन्होंने कहा कि विभागीय चर्चाओं व सूचनाओं से आ रही जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुछ जूनियर अफसरों ने सीनियर अफसरों की रिकॉर्डिंग की है। अब इस बातचीत की रिकॉर्डिंग को सरकार सार्वजनिक करे ताकि यह पता चल सके कि इस मामले में क्या-क्या डील किस-किस से हुई है।

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