DNN मंडी
14 अगस्त। वन क्षेत्र में जल स्तर बृद्धि, सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता और निरंतरता तथा पानी के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उददेश्य सेे आरम्भ प्रदेश सरकार की पर्वत धारा योजना जिला मण्डी के वन मण्डल नाचन तथा जोगिन्द्रनगर में प्राकृतिक संपदा की प्रहरी बन प्रतिष्ठित हुई है।
पर्वत धारा योजना के तहत वन क्षेत्र में तालाब, चेेक डेम, जल संचायन ढांचों का निर्माण, पौधारोपण, बाड़-बंदी आदि कार्योें को अन्जाम दिया जा रहा हैं । पानी को आज और आने वाले कल के लिए सहजने में वरदान सिद्ध हो रही इस योजना के चलते नाचन वन मण्डल के तहत सिराज फाॅरेस्ट रेंज में चिल्लुम गाड और बूढ़ा केदार वन क्षेत्र में 48 चेक डेम, 28 तालाब, 12 फार्म पोंड, बनाने के साथ ही 9.64 हैक्टेयर क्षेत्र में फलदार पौधे रोपित करने के अलावा एक नर्सरी भी विकसित की गई हैं। इसके अलावा आगजनी की घटना से वनस्पति को सुरक्षित रखने के आशय से 8 फायर वाचर रखे गये हैं ।
वन मण्डल अधिकारी तीर्थ राज धीमान ने बताया कि नाचन में 15 वर्ग कि0मी0 में फैेले चिल्लम गाड, बुढ़ा केदार और तुंगासी क्षेत्र में पर्वत धारा योजना को लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के चलते जल स्त्रोतों का संवर्धन होगा तथा वन प्राणियों को निश्चित रूप से गर्मियों के मौसम में पानी की उपलब्धता होने के अतिरिक्त वनस्पति कवर विकसित होगा। योजना के चलते वनों में फलदार पौधे रोपित किए जाएंगें, जिससे वन्य प्राणियों को फलों की उपलब्धता रहने के कारण फसल को भी वन्य प्राणियों से सुरक्षित रखा जा सकता हैै । इस योजना के अन्र्तगत नाचन में चूली, शेगल, पाजा, खनौर, जामू आदि फलों के पौधे रोपित किए गये हैं ।
पर्वत धारा योजना के तहत जोगिन्द्रनगर के एतिहासिक कमलाह रेंज में चंद गला नाला, भूर नाला, हेलाॅन नाला, ब़ाड़ाधार नाला, खेरी नाला, भड़ित नाला में 54 चैक डेम तथा 12 हजार 99 वर्ग मीटर में टरेंचिज बनाए गए हैं । इसके अतिरिक्त बाड़ाधार तथा खेरी में फार्म पोंड ओैर निरीक्षण मार्ग बनाया गया हैं ।
वन मण्डल अधिकारी ने बताया कि पर्वत धारा योजना के तहत ही चीड़ के जंगल की बाड़़ बंदी की जा रही हैं । जिससे वनस्पति को प्राकृतिक रूप से विकसित होने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस योजना के चलते सिल्ट रहित भू जल स्तर में वृद्धि होने के परिणाम स्वरूप लोगों को पर्याप्त पेयजल भी उपलब्ध होगा।
पर्वत धारा योजना विलुुप्त हो रहे जल स्रोतों का जिर्णाेंद्धार, ढलानदार खेतों की सिंचाई, भूजल स्तर में वृद्धि करने का आधार बनी हैं। इस योजना के चलते प्राकृतिक संपदा का संरक्षण होने से वन्य प्राणियों भी प्रकृति के साानिध्य और स्नेह से वंचित नहीं रहेेंगे।















