DNN सोलन ब्यूरो
02 नवंबर। जिला के स्कूलों में कोरोना काल के बीच नियमित कक्षाएं लगाने के लिए 3500 विद्यार्थी पहुंचे है। हालांकि, कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्यां न के बराबर थी। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति शहरी क्षेत्र के स्कूलों से अधिक रही। सबसे अधिक धुंधन स्कूल में 380 में से 250 छात्र उपस्थित हुए।बता दें कि कोविड काल में सरकार ने प्रदेश में सौ फीसदी अध्यापकों अन्य स्टाफ के साथ स्कूलों को खोल दिया है। 10वीं और 12वीं की कक्षाएं पिछले कई दिनों से लग रही हैं व अब 9वीं व 11वीं की कक्षाएं भी सोमवार से शुरु कर दी गई हैं। अभी बहुत कम अभिभावक बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। सोलन जिला में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की सं या 25 हजार है व सोमवार को जिला के स्कूलों में करीब 3500 छात्र-छात्राएं उपस्थित हुए। छात्रों की उपस्थिति में थोड़ी-थोड़ी वृद्धि भी दर्ज की जा रही है, लेकिन अभी यह करीब 15 फीसदी से भी कम है।
जिला के रावमापा धुंधन स्कूल में 380 छात्रों में से 250 छात्र उपस्थित हुए। रा.व.मा. छात्रा सोलन में 713 छात्राओं में से 16 व रावमा छात्र पाठशाला सोलन में 546 में से 3, जौणाजी स्कूल में 132 में से 21, ओच्छघाट में 265 में से 23, कल्होग में 155 में से 42 छात्र अपने अभिभावकों की लिखित अनुमति के साथ स्कूल पहुंचे। शहरी क्षेत्रों में बसों में भीड़ भी छात्रों के कम आने का कारण है। जो भी बसें आसपास के क्षेत्रों से शहरों की ओर आती हैं उनमें अक्सर भीड़ रहती है और बसों की भीड़ में बच्चों को भेजने से अभिभावक कतरा रहे हैं।
सभी निर्देशों का हो रहा पालन
स्कूलों में बच्चों की कक्षाएं लगाने को लेकर जारी सरकार के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है। स्कूल में प्रवेश से पहले थर्मल स्केनर से जांच, सेनिटाइजर का इस्तेमाल, सोशल डिस्टेंसिंग, कक्षा में बच्चों को 1 डेस्क छोड़कर बिठाने सहित अन्य निर्देशों का पालन किया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को अपना लंच, कॉपी, पुस्तकें आदि शेयर न करने व हैंड सेनिटाइजर अपने साथ रखने के बारे में बताया जा रहा है।
क्या कहना है शिक्षा उपनिदेशक सोलन का
शिक्षा उपनिदेशक उच्च, जिला सोलन योगेंद्र मखैक का कहना है कि बच्चे स्कूल आएं या न आएं, क्योंकि यह अभिभावकों का निर्णय होगा कि बच्चे को स्कूल भेजना है या नहीं, लेकिन इस सब के बावजूद लॉकडाउन के दौरान शिक्षा जारी रखने के लिए शुरु की गई। हर घर पाठशाला जारी रहेगी। बच्चे घर पर रहकर भी स्कूल का कार्य कर सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में बसों में अधिक भीड़ होने के कारण भी अभि ाावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। इसे लेकर शिक्षा मंत्री ने विभाग के अधिकारियों के साथ भी सोमवार को ऑनलाइन बैठक की। इसमें बसों की दिक्कत को देखते हुए उन क्षेत्रों से डाटा एकत्र करने की भी बात कही गई जहां बसों में अधिक रश होता है। ऐसे में उन क्षेत्रों में अतिरिक्त बसें चलाने पर भी विचार किया जाएगा।
















