DNN बिलासपुर
3 फरवरी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ0 प्रकाश दरोच ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की योजना है। इस योजना का आरम्भ 12 अप्रैल 2005 में किया गया था। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि गरीब गर्भवती महिलाओं, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती हो तथा प्रवासी मजदूरों की गर्भवती महिलाओं जिन्होंने अपना नाम स्वास्थ्य संस्थान में पंजीकृत करवाया हो सभी इस के लिए पात्र हैं। इसका उदेश्य संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को बढावा देना है। इससे गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जांच और प्रसव के बाद देखभाल और निगरानी करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने बताया कि बिलासपुर में जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थियों को अब सहायता के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को सरकारी अस्पताल में व चुनिंदा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव करवाने पर 11सौ रूपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। उन्होंने बताया कि बीपीएल वर्ग में आनी बाली महिलाओं को होम डिलीवरी पर 500 रुपये दिए जाते है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से बच्चों के जन्म के समय मां और नवजात शिशु मृत्यु दर को रोकना है। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना में आशा वर्कर का महत्वपूर्ण किरदार है।आशा कार्यकर्ता ही गर्भवती माहिलाओं की पहचान से लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सभी प्रकार की ओैेपचारिकताएं पूरी करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना का लाभ पाने के लिए जरुरी दस्तावेजों में
आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, अस्पताल द्वारा जारी डिलीवरी सर्टिफिकेट और महिला का बैंक अकाउंट नंबर और प्रवासी मजदूरों की गर्भवती महिलाओं को स्थानीय पंचायत प्रधान द्वारा जारी प्रमाण पत्र देना होगा।
उन्होंने अनुरोध किया है कि हर गर्भवती अपना प्रसव अस्पतालो में ही करवाएं ये जच्चा बच्चा दोनों के लिए सुरक्षित है।















