DNN सोलन
विगत तीस वर्षों से हिमाचल प्रदेश में व्यंग्य विधा में सक्रिय अशोक गौतम का 27 वां व्यग्य संग्रह चिकन शिकन ते हिंदी सिंदी प्रकाशित होकर बाजार में पाठकों के लिए उपलब्ध हो चुका है। उनका यह व्यंग्य संग्रह देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन देशभारती प्रकाशन, दिल्ली के युवा निदेशक मोहित सिंह ने प्रकाशित किया है। प्रकाशित व्यंग्य संग्रह के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश के चर्चित साहित्य समीक्षक डा. हेमराज कौशिक का कहना है कि अशोक गौतम का हर व्यंग्य विनोद और सामयिक विसंगतियों के बीच पुल का काम करता है। यही वजह है कि इनके व्यंग्य देश के पाठकों द्वारा ही नहीं अपितु विदेशों में भी डटकर पढ़े जाते रहे हैं। इनके व्यंग्य अपने देश के पाठकों के बीच भी उतना ही आदर पाते है। जितना विदेशी पाठकों के बीच। इनके व्यंग्यों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इनमें हर पाठक अपने को सहज ही खड़ा जुड़ा देख सकता है। इनके व्यंग्य को पढ़ते हुए लगता है कि पाठक भी ज्यों कहीं न कहीं इनके व्यंग्य का हिस्सा हो।
इस संदर्भ में डा. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि विगत वर्ष अशोक गौतम के ग्यारह व्यंग्य संग्रह- श्री श्री एक सौ साठ श्री, गरम जेब ठंडी रजाई, सिंक पर बॉस, हवा भरने का इल्म , डुप्लिकेट चाबियों का माहिर , अभी तो मैं जवान हूं, पांव दबा, पांव जमा, ओम् व्हाट्स्यापाय नम:, आओ दलाली खाएं, भक्ति बिनु मुक्ति नाहीं गोपाला और ओ तेरी… प्रकाशित हुए हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर व्यंग्य विधा और हिमाचल प्रदेश के साहित्यिक जगत के लिए प्रसन्नता की बात है। विगत वर्ष जितने व्यंग्य संगह्र अशोक गौतम के प्रकाशित हुए हैं उतने राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक व्यंग्यकार के प्रकाशित नहीं हुए हैं। अशोक गौतम के व्यंग्य लेखन पर बात करते हुए वे कहते हैं के उनके व्यंग्य की पैनी नजर से समाज की कोई भी विकृति बच कर नहीं रह सकती। यही बात उनके नए व्यंग्य संग्रह चिकन शिकन ते हिंदी सिंदी में भी सहज देखी पढ़ी जा सकती है।