DNN सोलन ब्यूरो
17 मार्च। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन का एक वीडियो वायरल होने के बाद विवादों में आ गया है। नवजात के तीमारदारों ने शिशु रोग विशेषज्ञ पर कई प्रकार के आरोप लगाए है और ड्यूटी समय पर नशे में धुत रहने की बात भी कहीं है। इस दौरान नवजात कर पिता द्वारा चिकित्सक से बातचीत के दौरान सोशल मीडिया में लाइव वीडियो बनाया है और यह वीडियो वायरल हो रहा है।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन इन आरोप को बेबुनियाद बताया रहा है और नवजात को पूरा इलाज देने की बात कही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर पुलिस या अस्पताल प्रशासन को रात ही शिकायत दी जाती तो तुरन्त मेडिकल करवाया जा था। बरहाल, अब इस मामलें में आगामी कार्रवाई क्या होगी यह देखना होगा।
हुआ यूं कि तीमारदार का नवजात क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में भर्ती किया गया था। चार दिनों से नवजात का इलाज यहां पर चला हुआ था और चिकित्सक के अनुसार बच्चे को हेवी डॉजिज दी जा रही थी। इसका कोर्स पांच दिन में पूरा होना था। शुक्रवार को चौथे दिन देर शाम नवजात की तबियत ओर खराब हो गई। इसके बाद नवजात के पिता व अन्य ने आईजीएमसी शिमला भेजने का चिकित्सक से आग्रह किया। वीडियो में तीमारदार ने आरोप भी लगाया है और नवजात को रैफर न करने की बात भी कही है। नवजात के पिता बार-बार यह भी कह रहे है कि दो दिन से बच्चा बेहाल है और लगातार रो रहा है, लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ ने मासूम को टच तक नहीं किया है। वीडियो बनाते समय वार्ड सिस्टर भी इस दौरान मौके पर आई। इसके बाद बच्चे को रैफर किया गया है।
गौरतलब हो कि क्षेत्रीय अस्पताल सोलन इससे पहले भी कई बार विवादों में आ चुका है और लोग कई प्रकार के आरोप चिकित्सक व अस्पताल स्टाफ पर लगा चुके हैं। अब फिर एक नया मामला सामने आया है।
क्या कहना है अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक का
उधर, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ अशोक हांडा ने बताया कि वीडियो के अनुसार नवजात के पिता व तीमारदार ने शिशु रोग पर कई प्रकार का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उपस्थित चिकित्सक उन्हें इस प्रकार का कुछ भी नहीं कह रहे थे। उन्होंने बताया कि सम्बंधित चिकित्सक से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने यह भी बताया कि वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे और इस दोईं कोई नशा नहीं किया गया था। नवजात के पिता काफी हाइपर थे। चिकित्सक द्वारा इलाज किया गया था और रैफर भी किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर तीमारदार उसी समय पुलिस व अस्पताल में शिकायत करते तो तुरन्त मेडिकल करवाया जाना था। अभी भी कोई शिकायत आती है तो इस मामलें में जांच अस्पताल प्रशासन द्वारा बैठाई जाएगी।















