DNN कुल्लू ब्यूरो
03 नवम्बर। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों को एक बेहतर इंसान बनाना है जो एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान कर सके। यह बात शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिग के माध्यम से हि.प्र. राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की गतिविधियों व उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए कही। गोविंद ठाकुर ने कहा कि एससीईआरटी का कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। बेहतर अध्यापन का प्रशिक्षण प्रदान कर बच्चों में अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों का प्रवाह करने में बहुमूल्य योगदान है।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था, लेकिन देखते ही देखते इसने समूचे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। इस महामारी के कारण अनेक सामाजिक विषमताएं उत्पन्न हुई। आर्थिक गतिविधियां ठहर सी गई, लेकिन समय के साथ अर्थव्यवस्था को तथा अन्य सभी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाना जरूरी हो गया। शिक्षा का क्षेत्र अछूता नहीं रहा। शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखना पड़ा जिससे कहीं न कहीं बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा हालांकि ऑनलाइन शैक्षणिक गतिविधियां जारी रही। हर घर पाठशाला, इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई जैसे अनेक प्रयास किए गए। जहां इंटरनेट नहीं था, अध्यापकों ने पाठन सामग्री घर घर जाकर बच्चों को उपलब्ध करवाई ताकि पढ़ाई में बाधा न आए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एससीईआरटी को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
एससीईआरटी ने जो कार्ययोजना तैयार की है, वह स्वंय इसका अध्ययन करेंगे। उन्होंने इस संबंध में कार्ययोजना की प्रस्तुति देने को कहा। उन्होंनें कहा कि इसमें स्टाफ के मुद्दे अथवा अन्य कोई बेहतर सुझाव होंगे, उन्हें शिक्षण गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एससीईआरटी ने आत्मनिर्भर भारत, एक भारत, श्रेष्ठ भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बच्चों की निबंध प्रतियोगिताएं करवाई हैं। यह एक सराहनीय प्रयास है और बच्चों के नवीनतम विचारों पर गौर किया जाएगा। इन्हें देशहित में किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है, इसपर चिंतन करेंगे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की तरजीह पर आत्मनिर्भर हिमाचल अथवा आत्मनिर्भर मेरा जिला पर बच्चों के विचारों का संकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने का मकसद नौकरी की तलाश में ठोकरें खाना नहीं होना चाहिए, बल्कि नौकरी प्रदाता बनाने से है। इसपर सभी को मिलजुल कर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। वे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के क्षेत्र में नये आयाम जोड़े और इन्हें व्यवहारिक रूप दें।















