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DNN सोलन

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट-सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एग्रोप्रेन्योरशिप (मैनेज-सी॰आई॰ए॰), हैदराबाद ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के सहयोग से  विश्वविद्यालय में ‘एग्री-स्टार्टअप स्टेक होल्डर्स कनेक्ट-फोस्टरिंग कोलैबोरेशन एंड पार्टनरशिप’ शीर्षक कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन में विश्वविद्यालय के 200 से अधिक छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ 26 स्टार्टअप और कृषि हितधारकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंद्र देव ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य शोधकर्ताओं, इनक्यूबेटरों, नीति निर्माताओं, कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप, कृषि-उद्योगों, निवेशकों, विस्तार कार्यकर्ताओं, छात्रों सहित विभिन्न हितधारकों को एकजुट कर एक मंच पर लाना है। यह कार्यक्रम ने स्टार्टअप परिदृश्य के विकास में सामूहिक रूप से योगदान देने के लिए कृषि व्यवसाय और कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में नवाचारों, विशेषज्ञता और अनुभवों को प्रस्तुत और आदान-प्रदान करने के लिए एक मंच दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने फार्म गेट से हटकर गतिविधियों में वैश्विक रुचि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि, बागवानी और वानिकी स्नातकों को नौकरी प्रदाता बनने के लिए स्टार्ट-अप के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रोफेसर चंदेल ने स्टार्टअप के लिए विकसित हो रही सहायता प्रणाली और नए विचारों को लाभदायक उद्यमों में बदलने के लिए अनुकूल स्टार्ट-अप वातावरण का उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालय के अनुसंधान स्टेशनों और कृषि विज्ञान केंद्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठकों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के कृषि स्टार्टअप्स को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करेगा। उन्होंने स्टार्टअप्स द्वारा किए गए कार्यों से वैज्ञानिक डेटा जनरेट करने के लिए विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्रों का उपयोग करने का भी सुझाव दिया।

मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चम्बाघाट के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने विभिन्न मशरूमों का पोषण महत्व पर जोर देते हुए छात्रों से अपने स्वयं के मशरूम उद्यम शुरू करने का आवाहन किया। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के निदेशक डॉ. अरुण चंदन का विचार था कि हिमालय क्षेत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों और पौधों का उपयोग करके स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी हुई है और उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए औषधीय पौधों की गुणवत्ता रोपण सामग्री का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का कार्य विश्वविद्यालय कर सकता है। मैनेज के निदेशक कृषि विस्तार डॉ. सरवनन राज ने बताया कि देश में स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बढ़ रहा है, लेकिन देश में लगभग 5600 कृषि स्टार्ट-अप ही मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी और वानिकी क्षेत्र उभरते उद्यमियों के लिए व्यापक संभावनाएं प्रदान करते हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में अभी कम कार्य हुआ है। डॉ. राज ने कहा कि कृषि स्टार्टअप को विकास भागीदार के रूप में देखा जाता है क्योंकि वे लागत प्रभावी सेवाओं के साथ समाधान प्रदान करने में सहायता करेंगे।

इस कार्यक्रम में कुल 26 स्टार्टअप जिसमें हिमाचल के 22 स्टार्टअप शामिल थे ने अपने कहानी प्रतिभागियों के साथ साझा की और प्रदर्शनी में अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के विविध दृष्टिकोण और अंतर्दृष्टि ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारियों और विभागाध्यक्षों, कृषि विभाग और SAMETI के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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