DNN सोलन
यदि केंद्र सरकार बिजली कानून में संशोधन करती है, तो इसे आगामी समय में कर्मचारियों के साथ साथ उपभोक्ताओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस संशोधन के बाद बिजली बोर्ड के कई काम निजी क्षेत्रों में चले जाएंगे जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा । यह बात सोलन में विद्युत बोर्ड कर्मचारी नेताओं ने कहीं बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस संशोधन को मंजूरी दी तो कर्मचारी अपना आंदोलन और तेज करेंगे।
विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन की सोलन इकाई के महासचिव जितेंद्र चंदेल ने बताया कि केंद्र द्वारा कानून में संशोधन के मसौदे को संसद में पेश करने से पहले ही कर्मचारियों ने देशभर में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसमें राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी आदोलन में शामिल हो गए हैं।
राज्य बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन की सोलन इकाई ने भी इस धरने में भाग लिया।
सोलन इकाई के प्रधान सोहनलाल महासचिव जितेंद्र चंदेल ने बताया कि शीत सत्र में पारित करने के लिए केंद्र सरकार संशोधन विधेयक ला रही है। संशोधन कानून के प्रभाव में आने से बिजली बोर्ड विघटित होकर सभी कार्यो को अलग-अलग करने के साथ वितरण के कार्य को छोटी-छोटी कंपनियों में बांटा जाएगा जिसके कारण कर्मचारियों को परेशानी होगी। साथ ही उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने की पूरी पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है। इसे अभी विद्युत दरें तय करते समय क्रॉस सबसिडी को कम किया जा रहा है। कानून बनने से दूरदराज क्षेत्रों में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।















