विधि चन्द ने स्वरोजगार से दिखाई आर्थिक स्वावलंबन की राह  

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DNN कांगड़ा
पालमपुर तहसील में स्थित है देहरियां गांव। इन दिनों इस गांव में लोगों को अपने आत्मविश्वास के बूते आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाले एक बुजुर्ग पुरूष विधि चन्द की खूब बात हो रही है। विधि चन्द ने जिदंगी की तमाम बाधाओं को पार करते हुए अपने घर की आर्थिक स्थिति को बदल डाला है और एक नई सामाजिक पहचान बनाई है। छोटे से घर में एक बड़ा परिवार, चारों तरफ निर्धनता, कुछ ऐसी ही कहानी है विधि चन्द की। विधि चन्द गरीबी और विवशता से हताश होकर वह एक बेहतर जीवन जीने की सभी आशाएं खो चुके थे। इधर-उधर छोटे कार्य करके तथा मनरेगा में मजदूरी करके वह अपना व परिवार का खर्चा चलाते थे परन्तु वह इतना नहीं कमा पाते थे कि सही ढ़ग से अपने परिवार का खर्चा चला सकें। इसके अलावा दूसरा कोई आजीविका का साधन नहीं था। ऐसे में विधि चन्द को पंजाब नैशनल बैंक के धर्मशाला स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा देहरियां में लगाए गये जागरूकता शिविर में संस्थान द्वारा चलाए जा रहे इच्छुक लोगों को उन्नत कृषि बारे प्रशिक्षण देने का पता चला। उन्हें आशा की किरण नजर आई और उन्होंने तुरन्त संस्थान से सम्पर्क किया। पता चला संस्थान ये प्रशिक्षण निःशुल्क करवाता है, भोजन और रहने का खर्चा भी वे ही करते हैं। फिर क्या था, उन्होंने सब्जी नर्सरी प्रबन्धन एवं सब्जी उत्पादन के छः दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिला ले लिया।
       विधि चन्द बताते हैं कि उनके लिए यह प्रशिक्षण बहुत उपयोगी साबित हुआ। इस दौरान उन्होंने खेतीबाड़ी की उन्नत तकनीकों तथा व्यवसाय चलाने के साथ-साथ नकदी फसलों की खेती करने की विधि के बारे में भी पूरी जानकारी ली। विधि चन्द बताते कि उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपने 2 बेटों के साथ लगभग 50 हजार रूपये की पूंजी लगाकर सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। मेहनत और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान के बूते देखते ही देखते दिन बदलने लगे। सब्जियां बेचने के लिए उन्होंने अपना एक थ्री व्हीलर तथा एक वैन ले ली है। जिसमें वेे सब्जियों को आसपास के गांवों तथा सब्जी मंडी में बेचते हैं और हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रूपये कमा रहे हैं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। उनका सारा परिवार उनके साथ सब्जी उत्पादन का कार्य कर रहा है।
         पंजाब नैशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक कमल प्रकाश बताते हैं कि संस्थान जरूरतमंद एवं इच्छुक लोगों को स्वरोजगार आरम्भ करने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण देता है, ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर हो सकें। वे बताते हैं कि संस्थान 18 से 45 वर्ष तक की महिलाओं और पुरूषों को डेयरी फार्मिंग, खुम्ब उत्पादन, सब्जी नर्सरी प्रबंधन और सब्जियों की खेती, आलू एवं प्याज की खेती और प्राकृतिक संरक्षण, अचार और पापड़ बनाना, खिलौने बनाना, डुने पत्तल बनाना, कपड़े के बैग बनाना तथा मोबाईल रिपेयरिंग जैसे विभिन्न रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की समाप्ति पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं, जिसके द्वारा वे स्वरोजगार हेतु जिला कांगड़ा के किसी भी बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
क्या कहते हैं जिलाधीश
        जिलाधीश कांगड़ा संदीप कुमार का कहना है कि सभी जिलावासियों विशेषकर युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया जा रहा है, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। प्रशासन के इन प्रयासों में पंजाब नैशनल बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो बेहद सराहनीय है। इस प्रकार के प्रशिक्षणों से लोग क्षेत्र विशेष के लिए आवश्यक ज्ञान प्राप्त कर एवं कौशल विकास से स्वरोजगार अपनाकर स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ें हैं। उनका कहना है कि जिला प्रशासन लोगों को स्वरोजगार आरम्भ करने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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