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सोलन, 18 सितंबर। Public Policy India (PPI) और L.R. Group of Institutes द्वारा Ministry of Youth Affairs and Sports तथा MY Bharat के सहयोग से सोलन में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 – यंग प्रोफेशनल्स राउंडटेबल’ का आयोजन किया गया। राउंडटेबल का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए भविष्य-सक्षम कार्यबल का निर्माण’ रहा। कार्यक्रम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की भूमिका और भविष्य की आवश्यकताओं पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत VBYLD 2026 के प्रस्तुतकर्ता विराज सूद के युवा प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादकता लाभांश में बदलने के लिए सामुदायिक कौशल प्रयोगशालाएं, ग्राम कौशल बैंक और फ्यूचर स्किल पार्क स्थापित करने का सुझाव दिया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. (प्रो.) कुलभूषण चंदेल ने शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्षमता, नवाचार और मूल्यों का विकास भी जरूरी है।
Kontent Factory की संस्थापक एवं सीईओ रितिका सिंह ने युवाओं से चरित्र निर्माण, चुनौतियों से निपटने की क्षमता तथा विश्वसनीय व्यक्तिगत पहचान विकसित करने का आह्वान किया। वहीं Public Policy India एवं STRIDE के संस्थापक यश अग्रवाल ने युवाओं को देश में ही करियर के अवसर तलाशने, इंटर्नशिप के माध्यम से अनुभव हासिल करने और ऐसे मानवीय कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।
L.L.R. Educational Trust की प्रबंध निदेशक डॉ. (एच.सी.) शची सिंह ने स्कूलों, आईटीआई और विश्वविद्यालयों में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को शिक्षा का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में MY Bharat सोलन के जिला युवा अधिकारी भूपेंद्र सिंह गिल भी उपस्थित रहे। इसके अलावा विभागाध्यक्ष डॉ. निशा शर्मा, डॉ. कंचन बाला जैसवाल, डॉ. श्वेता संधू, डॉ. अवनीत गुप्ता तथा रजिस्ट्रार श्री सूरत सिंह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
राउंडटेबल के दौरान आयोजित संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने भविष्य के कौशल, जमीनी स्तर पर कौशल विकास तथा शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए विवेक, सहानुभूति, ईमानदारी और आजीवन सीखने की भावना जैसे मानवीय गुणों का विकास भी आवश्यक है।














