वनों को रोजगार का साधन बनाने का प्रयास : किशन कपूर

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DNN धर्मशाला

खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर ने कहा कि हिमाचल सरकार प्रदेश में वन संरक्षण पर बल देते हुए वनों को रोजगार और आजीविका का साधन बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य से अनेक योजनाएं आरंभ की हैं। इसके लिए वर्तमान वित्त वर्ष में 651 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
किशन कपूर आज धर्मशाला के समीप चोहला गांव में वन विभाग द्वारा आयोजित पौधरोपण अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए बोल रहे थे। इस मौके उन्होंने स्वयं देवदार का पौधा लगाया। उनके साथ साथ गांव के लोगों और अधिकारियों ने भी देवदार और बान के पौधे लगाए। किशन कपूर ने कहा कि प्रदेश में वन समृद्धि जन समृद्धि योजना शुरू की गई है, इसके जरिये लोगों को जड़ी बूटी इकट्ठा करने, प्रसंस्करण और विपणन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा पौधरोपण एवं उनके संरक्षण में समुदाय की भागीदारी तय बनाने के लिए प्रदेश में सामुदायिक वन संवर्धन योजना आरंभ की जा रही है। इस योजना के तहत युवक व महिला मंडलों को पौधरोपण के लिए भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इसी प्रकार स्कूली बच्चों को वन संरक्षण के अभियान से जोड़ने के लिए विद्यार्थी वन मित्र योजना शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत स्कूलों को भी भूखंड आवंटित किए जाएंगे। आवंटित भूखंड में स्कूली बच्चे पौधारोपण कर साल भर उनकी देखभाल भी करेंगे।

किशन कपूर ने कहा कि प्रदेश में जब जब भाजपा सरकार रही है, वनों के संरक्षण और इन्हें जीविका कमाने का साधन बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में 1990 में वन लगाओ रोजी कमाओ अभियान आरंभ किया गया था। उस अवधि में जो पौधे लगाए गए वे आज घने जंगल का रूप ले चुके हैं। इससे प्रदेश में वन संवर्धन को बड़ा बल मिला है। इसी प्रकार 2008 में प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने जन-जन संजीवनी अभियान छेड़ा था। उस समय जगत प्रकाश नड्डा प्रदेश के वन मंत्री थे। इसके तहत हर घर में औषधीय पौधे दिए गए थे। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के नेतृत्व में वर्तमान सरकार वन संरक्षण, संवर्धन और इन्हें पर्यटन व अन्य रोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।

 

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