DNN शिमला ब्यूरो
17 नवम्बर। भारत को आजादी दिलाने में विशेष योगदान देने वाले लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राजधानी शिमला की लाला लाजपत राय चौक पर उनकी प्रतिमा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर उनके साथ हिमाचल प्रदेश सरकार में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज भी मौजूद रहे। लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की।
लालाजी ने 1920 में कलकत्ता में कांग्रेस के एक विशेष सत्र में भाग लिया। वे गांधीजी द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किए गए असहयोग आंदोलन में कूद पड़े, जो सैद्धांतिक तौर पर रौलेट एक्ट के विरोध में चलाया जा रहा था। लाला लाजपतराय के नेतृत्व में यह आंदोलन पंजाब में जंगल में आग की तरह फैल गया और जल्द ही वे ‘पंजाब का शेर’ या ‘पंजाब केसरी’ जैसे नामों से पुकारे जाने लगे।

लालाजी ने अपना सर्वोच्च बलिदान साइमन कमीशन के समय दिया। 3 फरवरी 1928 को कमीशन भारत पहुंचा जिसके विरोध में पूरे देश में आग भड़क उठी। लाहौर में 30 अक्टूबर 1928 को एक बड़ी घटना घटी, जब लाला लाजपतराय के नेतृत्व में साइमन का विरोध कर रहे युवाओं को बेरहमी से पीटा गया। पुलिस ने लाला लाजपतराय की छाती पर निर्ममता से लाठियां बरसाईं। वे बुरी तरह घायल हो गए और अंतत: इस कारण 17 नवंबर 1928 को उनकी मौत हो गई।
लालाजी की मौत से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चन्द्रशेखर आजाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी की मौत का बदला लेने की ठानी। इन जांबाज देशभक्तों ने लालाजी की मौत के ठीक 1 महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसंबर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। लालाजी की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फांसी की सजा सुनाई गई।















