DNN कुल्लू
कोरोना वायरस की आहट सुनते ही कुल्लू जिला प्रशासन ने कमर कस ली थी। वायरस को रोकने के लिए हर मोर्चे को सचेत व सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गई। जानलेवा वायरस जिला में प्रवेश न कर सके, इसके लिए समय पर हर एहतियाती उपाय किए गए। अनेक प्रकार की समितियों के गठन एवं प्रबंधों के बीच जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र जिला प्रशासन के लिए सूचना के सबसे प्रभावी तंत्र के तौर पर उभर कर सामने आया। चैबीस घण्टे काम करने वाला यह केन्द्र लाॅकडाउन काल में आम जनमानस को बड़ा सुविधाजनक और सुगम केन्द्र के तौर पर उभरा है। परिचालन केन्द्र के टाॅल-फ्री नम्बर 1077 का सोशल मीडिया तथा लाउड-स्पीकरों के माध्यम से जन-जन तक प्रचार किया गया जिसके कारण किसी भी आपातकाल में लोगों की निर्भरता इस केन्द्र पर बढ़ने लगी।
आपातकालीन परिचालन केन्द्र के समन्वयक प्रशांत ने बताया कि कोविड-19 एक बहुत बड़ी वैश्विक आपदा है। ऐसे में इस केन्द्र की बहुत बड़ी जिम्मेवारी है। इस संबंध में सभी प्रकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान अविलंब किया जाना स्वाभाविक है। जिला के सभी जिला स्तरीय, उपमण्डल स्तरीय व खण्ड स्तरीय विभागीय कार्यालयों से सूचना का एकत्रीकरण और संकलन इस केंद्र की कार्यशैली का नियमित हिस्सा बन चुका है।
सोशल मीडिया पर आज हर कोई व्यक्ति अपनी सुविधानुसार सूचना अपलोड करने से परहेज नहीं करता जो कभी-कभार शासन व प्रशासन के कार्यों के लिए भी चुनौती बन जाती है। सोशल मीडिया पर ऐसी तथ्यविहीन सूचनाओं को काउंटर करने के लिए तथा शासन-प्रशासन को पुख्ता एवं त्वरित जानकारी उपलब्ध करवाने में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। संबंधित विभागों से सूचना एकत्रित एवं संकलित करना अपने आपमें एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी का काम है। किसी भी तरह की आपदा के बेहतर प्रबंधन के लिए ऐसी सूचनाएं बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं।
प्रशांत बताते हैं कि जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र में टाॅल-फ्री 1077 के अलावा चार अन्य टेलीफोन नंबर 01909-225630, 31, 32 और 33 भी लोगों की सुविधा के लिए उपलब्ध करवाए गए हैं। केन्द्र में सोहन, शीला, शोभा व हेम राम सहित चार डाटा एंट्री आॅपरेटर्स के अलावा दीपिका, चुन्नी लाल, धीरज व प्रेम, चार कंप्यूटर आपरेटर चैबीस घण्टे अलग-अलग शिफ्टों में काम कर रहे हैं। इनके अलावा, प्रलेखन समन्वयक राकेश कुमार और कानूनगो सुंदर सिंह ठाकुर भी केन्द्र में तैनात किए गए हैं। केन्द्र में सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने व मास्क के उपयोग का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। केन्द्र के नम्बरों में हर रोज 200 से 300 तक काॅल्स आती हैं और लोगों की शंकाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित बनाने के प्रयास किए जाते हैं।















