DNN नौणी(सोलन)
03 जुलाई । डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने विवि के खाद्य विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों
द्वारा एक डी॰एस॰टी॰ परियोजना के तहत विकसित प्रौद्योगिकी से सेब के सिरके का उत्पादन करने के लिए शिमला की
खाद्य प्रसंस्करण कंपनी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा ने विश्वविद्यालय की ओर से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर
पर रुहिल फूड प्रोसेसिंग यूनिट, शिमला से नंदा छजता और यशवंत छाजटा उपस्थित रहे। समझौते पर कुलपति डॉ.
परविंदर कौशल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। डॉ अंजू के धीमान, डीन कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर; डॉ. केडी
शर्मा, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, खाद्य विज्ञान विभाग और डॉ राकेश शर्मा, जो इस तकनीक को विकसित करने वाली
टीम का हिस्सा थे, भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
यह दूसरा स्टार्टअप है जिसने 40,000 रुपये का प्रौद्योगिकी शुल्क का भुगतान करके इस तकनीक के हस्तांतरण के
लिए विश्वविद्यालय के साथ नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, कंपनी
सेब का सिरका बनाने और बेचने के लिए विश्वविद्यालय की तकनीक का उपयोग करेगी और उत्पाद लेबल पर
विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी का नाम लिखा जाएगा।
प्रौद्योगिकी के बारे में डॉ. के॰ डी॰ शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय की प्रौद्योगिकी सेब का सिरका बनाने के पारंपरिक
तरीकों का एक विकल्प है और कृषि आय में सुधार के साथ-साथ बाज़ार में न बिकने वाले खराब क्वालिटी सेब के पूर्ण
उपयोग में उत्पादन में मददगार होगा। उन्होंने विभाग द्वारा विकसित कई अन्य तकनीकों और प्रक्रियाओं से अवगत
करवाया, जो उद्यम के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए डॉ. परविंदर कौशल ने कहा कि उद्यमियों का विश्वविद्यालय की प्रौद्योगिकियों पर विश्वास
देखना उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सेब के सिरके की मांग इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण
कई गुना बढ़ गई है।
डॉ कौशल ने कहा की उत्पादन क्षेत्र में उपयुक्त प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी की कमी के कारण हर साल प्रदेश में निम्न-श्रेणी
के आकार और विकृत सेब की एक बड़ी मात्रा बर्बाद हो जाती है। यह तकनीक इस समस्या से निपटने में मदद कर
सकती है। परंपरागत तरीके धीमें और खराब गुणवत्ता वाला सिरका देते हैं जबकि इसके विपरीत विश्वविद्यालय की
तकनीक में इन समस्याओं को दूर कर सिरके और बेस वाइन के उत्पादन में पेश आने वाली विभिन्न समस्याओं का
समाधान किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी को सेब से बहु-उत्पादों के उत्पादन और विकास का करना चाहिए
ताकि फल का पूरा उपयोग किया जा सके।















