DNN सोलन ब्यूरो
25 अक्तूबर। सोलन में अन्य त्योहारों की तरह इस बार दशहरा भी कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गया है। बाज़ारों में भीड़ भाड़ भी आम दिनों की तरह देखने को मिली है। साथ ही इस बार सैकड़ों सालों पुरानी परंपरा टूटी है। इस बार न तो दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले जलाए गए और न ही नवरात्रों पर रामलीला का आयोजन किया गया। दशहरे पर ठोडो मैदान में होने वाला दंगल मेला भी नहीं हुआ।
कोरोना वायरस के खतरे के चलते इस बार खेल मिठाई व अन्य स्टोल भी नहीं देखने को मिले है।
बता दें कि सोलन में सैकड़ों सालों से रावण दहन और रामलीला के आयोजन की परंपरा है। पिछले 38 वर्षों से तो जगद बा रामलीला मंडल इसका आयोजन करता आ रहा है। रामलीला का आयोजन न होने से जहां कलाकार मायूस हैं वहीं शहरवासी भी रामलीला मंचन देखने से महरूम रह गए। इस रामलीला का समापन दशहरे के दिन रावण दहन के साथ ही होता था। दशहरे के लिए नगर परिषद द्वारा रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के बड़े-बड़े पुतले बनाने के लिए कलाकार लाए जाते थे। इन पुतलों को दशहरे के दिन ठोडो मैदान में जलाया जाता था और इसी के साथ ही दसवें दिन रामलीला का भी समापन हो जाता था।
इसी के साथ ठोडो मैदान में विशाल दंगल का भी आयोजन किया जाता था, जिसमें प्रदेश व बाहरी राज्यों से पहलवान हिस्सा लेते थे। इस दौरान पूरा ठोडो मैदान दर्शकों से भर जाता है। इस बार ठोडो मैदान खाली-खाली नजर आया और यहां दशहरा मेले का आयोजन नहीं हो पाया। शहर में कुछ स्थानों पर व्यापारियों द्वारा मिठाईयों के स्टॉल तो लगाए गए थे, लेकिन यह स्टॉल भी खाली ही नजर आए।















