लैवेंडर स्थलों, स्कूलों में विज्ञान संग्रहालयों और पंचायत स्तर पर मौसम निगरानी के लिए सहयोग मांगा
Dnewsnetwork
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट की और हिमाचल प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित पहलों को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की। इस दौरान विशेष रूप से राज्य के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभ पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य सरकार के उस प्रस्ताव से अवगत करवाया, जिसके तहत लाहौल-स्पीति और पांगी के उच्च ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में लद्दाख के हानले में संचालित सफल खगोलीय पहलों की तर्ज पर खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के खगोलीय अनुसंधान और अवलोकन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का उपयोग करते हुए प्रस्तावित केंद्र विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान में रुचि विकसित करने के अवसर मिलेंगे तथा राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में सतत एवं ज्ञान-आधारित पर्यटन के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी चर्चा की और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के माध्यम से राज्य में लैवेंडर की डेमोंस्ट्रेशन साइट्स का विस्तार करने के लिए सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अधिक संख्या में प्रदर्शन स्थलों की स्थापना से किसानों को लैवेंडर की उपयुक्त खेती तकनीकों को समझने, फसल के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे एक वैकल्पिक एवं लाभकारी फसल के रूप में अपनाने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के आकांक्षी विकासखंडों के स्कूलों में विज्ञान संग्रहालय स्थापित करने के लिए सहायता का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विज्ञान संग्रहालय विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा के अवसर प्रदान करेंगे और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के प्रति उनकी रुचि को प्रोत्साहित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर मौसम निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने के महत्व पर बल देते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वचालित वर्षामापी यंत्र तथा विकासखंड स्तर पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने की पहल में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे पंचायत और विकासखंड स्तर पर वर्षा तथा अन्य मौसम संबंधी मानकों का सटीक एवं वास्तविक समय का आंकड़ा उपलब्ध होगा। इससे मौसम निगरानी व्यवस्था अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनेगी तथा किसानों को स्थान-विशिष्ट मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध होने से बेहतर कृषि योजना और सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
बैठक में हिमाचल प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों को मजबूत करने से जुड़े अन्य विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से राज्य के दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों तक वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक प्रौद्योगिकी के लाभ पहुंचाने पर बल दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दों और प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने मंत्रालय की ओर से प्रदेश को हर संभव सहायता एवं सहयोग प्रदान करने का आश्वासन भी दिया।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नागर विमानन मंत्री से भेंट की
केंद्रीय मंत्री ने कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी रिपोर्ट को दो माह में अंतिम रूप देने के निर्देश दिए
उड़ान योजना के तहत हिमाचल में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए केंद्र देगा वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से भेंट की और हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने और विमानन अवसंरचना के विस्तार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार का मामला प्राथमिकता से उठाते हुए कहा कि प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए बेहतर हवाई संपर्क अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेहतर हवाई सेवाओं से पर्यटकों की आवाजाही सुगम होने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी रिपोर्ट को दो माह के भीतर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के लिए सक्षम सलाहकार नियुक्त करने और निर्धारित समयावधि में रिपोर्ट तैयार करवाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी रिपोर्ट दो माह में तैयार हो जाती है, तो कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलेगी और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से परियोजना की लागत का यथार्थपरक आकलन करने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विकसित किए जा रहे हेलीपोर्ट के मुद्दे को भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध करवाने तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए हेलीपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने हेलीपोर्ट निर्माण के लिए केंद्र से सहयोग का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने उड़ान योजना के तहत हिमाचल प्रदेश में हेलीपोर्ट के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक में शिमला एयरपोर्ट से नियमित उड़ानों के संचालन पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने शिमला को नियमित हवाई संपर्क उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया। शिमला एयरपोर्ट की रनवे क्षमता के अनुरूप उपयुक्त विमानों के संचालन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री ने कांगड़ा एयरपोर्ट की तर्ज पर शिमला एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के स्थान पर हिमाचल प्रदेश पुलिस को सौंपने का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार, शिमला एयरपोर्ट से नियमित हवाई संपर्क और प्रदेश में हेलीपोर्ट नेटवर्क को सदृढ़ करने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार तथा केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।













