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नौणी: डॉ. भूपेश कुमार गुप्ता ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. गुप्ता को पादप रोग विज्ञान के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है और उन्हें फल एवं सब्जी रोग विज्ञान तथा जैविक रोग प्रबंधन में विशेषज्ञता प्राप्त है। उनका शोध कार्य पादप रोगों की विज्ञान, टिकाऊ रोग प्रबंधन तथा सिंथेटिक फफूंदनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए ट्राइकोडर्मा एवं अन्य लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर केंद्रित है।
जुलाई 2006 में कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर से विश्वविद्यालय में अपना कार्यकाल आरंभ करने वाले डॉ. गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश के चारों कृषि-जलवायु क्षेत्रों में कार्य किया है। इस दौरान उन्होंने शीतोष्ण एवं उपोष्ण फल फसलों तथा सब्जियों में व्यापक शोध एवं मैदानी अनुभव प्राप्त किया। क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लीची, सिट्रस, अमरूद और स्ट्रॉबेरी जैसी उपोष्ण फल फसलों पर कार्य किया तथा शिमला मिर्च प्रजनन कार्यक्रम में भी योगदान दिया।
क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा में उन्होंने विशेष रूप से सेब सहित शीतोष्ण फल फसलों पर शोध किया और विश्व बैंक वित्त पोषित हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत कीट निगरानी कार्यों में योगदान दिया।
सितंबर 2017 से वे विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में सब्जी रोग विज्ञान से जुड़े हुए हैं। उनके शोध में कोर रॉट, नेल हेड कैंकर और स्टेम ब्राउन कैंकर जैसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण सेब की बीमारियों का प्रबंधन तथा पौध स्वास्थ्य सुधारने के लिए जैविक मृदा संशोधनों एवं लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग शामिल है। डॉ. गुप्ता ने किसान प्रशिक्षण, कृषि प्रसार एवं वैज्ञानिक नेटवर्किंग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी, नई दिल्ली के आजीवन सदस्य हैं।














