जमीन विवाद पर MLA रामकुमार चौधरी का पलटवार भाजपा पर परिवार को बदनाम करने का आरोप

Baddi + Doon Politics

Dnewsnetwork बद्दी (सोलन)

दून विधानसभा क्षेत्र में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है यहां पर एक जमीनी विवाद अब सियासत मुद्दा बनता हुआ दिखाई दे रहा है भारतीय जनता पार्टी के नेता व पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने विधायक रामकुमार चौधरी पर जमीन के मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं जबकि दून के विधायक रामकुमार चौधरी ने भाजपा के आरोपी को बदनाम करने की और राजनीतिक करार देते हुए पलटवार किया है।

दून के विधायक रामकुमार चौधरी ने पूर्व विधायक की ओर से उठाए गए जमीन विवाद पर पलटवार करते हुए भाजपा पर उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। विवादित जमीन का वर्ष 2017 में मठ के प्रतिनिधियों के साथ आपसी सहमति से तबादला हुआ था। यह मंदिर की जमीन नहीं, बल्कि मठ से संबंधित जमीन है। ऐसे में इसे जमीन हड़पने का मामला बताकर राजनीतिक रंग देना गलत है।
चौधरी ने दावा किया कि भाजपा की शिकायत पर जमीन की म्यूटेशन रद्द होने के बाद उन्होंने नालागढ़ की अदालत में चुनौती दी थी और 16 नवंबर 2024 को फैसला उनके पक्ष में आया। जमीन के तबादले से संबंधित दस्तावेज उनके पास हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जमीन पर पेड़ काटने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले प्रमाण प्रस्तुत करें।
सरकारी जमीन पर कब्जे का भी लगाया आरोप
विधायक ने भाजपा से जुड़े कुछ लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लाखों रुपये किराया वसूलने के आरोप लगाए। उन्होंने वर्धमान चौक के पास निजी कंपनी से संबंधित करीब 48 बीघा जमीन का जिक्र करते हुए दावा किया कि सरकारी कार्रवाई के बावजूद वहां से किराया अर्जित किया जाता रहा। उन्होंने बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में बिजली बोर्ड की जमीन पर कथित कब्जों का मुद्दा भी उठाया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

बोले- विकास के मुद्दों पर बात करे भाजपा
रामकुमार चौधरी ने अपने कार्यकाल में दून क्षेत्र में करीब 600 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाने का दावा किया। बद्दी में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए तीन सबस्टेशनों के वास्ते करीब 104 करोड़ रुपये स्वीकृत करवाए गए हैं। सड़कों, पेयजल, बिजली और शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया गया है। उन्होंने भाजपा नेताओं को अपने कार्यकाल के विकास कार्यों का हिसाब सार्वजनिक करने की चुनौती देते हुए कहा कि व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

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