हिमाचल प्रदेश में स्पान उद्योग की अपार संभावनाएं

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DNN सोलन (नौणी)
डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के चम्बाघाट स्थित स्पान (spawn) अनुसंधान प्रयोगशाला में एम॰आई॰डी॰एच॰ परियोजना के तहत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में सोलन और बिलासपुर जिले के 15 मशरूम व स्पान उत्पादकों और उद्यान प्रसार अधिकारियों ने भाग लिया। परियोजना के समन्वयकडा॰ धर्मेश गुप्ता ने बताया कि नौणी विश्वविद्यालय द्वारा बनाया गया स्पान हिमाचल के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे की पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान व दिल्ली तक भी भेजा जाता है। उन्होनें मशरूम उत्पादन में अच्छी गुणवता वाले स्पान की उपयोगिता के बारे में विस्तार से समझाया और इसको बनाने की पूरी विधि भी प्रतिभागियों को बताई। डा॰ धर्मेश ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षुओं को प्रयोगिक प्रशिक्षण देना था। समापन समारोह में विश्वविद्यालाय के पादप रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा॰ एके गुप्ता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में स्पान उद्योग लगाने की अपार संभावनाएं है। खास बात यह है कि बटन मशरूम और ढिंगरी की स्पान की काफी डिमांड रहती है खासतौर पर सर्दियों के महीनों में, जब इसकी मांगको पूरा करना मुश्किल हो जाता है।स्पान में लगने वाली बीमारियों और इसका उद्योग शुरू करने के लिए सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन के बारे में भी प्रशिक्षण शिविर के दौरान बताया गया। इस शिविर में खुम्ब निदेशालय चंबाघाट के निदेशक डा॰ वीपी शर्मा ने प्रतिभागियों को हिमाचल और भारत में मशरूम की वर्तमान स्थिति और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरोंके बारे में भी अवगत करवाया। इनके अलावा डा॰ सीएल जनदैक, डा॰ बीसी सुमन और डा॰ सीडी थापा ने भी अलग- अलग विषयों पर अपने विचार रखें।

 

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