DNN सोलन
कृषि, जनजातीय विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डाॅ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि प्राकृतिक खेती में सही तकनीक के उपयोग से भूमि वातावरण से ही फसलों की पोषक तत्वों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है तथा शून्य लागत प्राकृतिक तकनीक में कृत्रिम उत्पादों का प्रयोग होने के कारण वातावरण पर भी इस का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। डाॅ. मारकंडा आज यहां डाॅ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी मेंएक दिवसीय अधिकारी एवं उत्तम किसान कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर किसानों को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले कृषि मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया।
इस कार्यशाला में प्रदेश भर में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती अपना चुके 321 किसानों और 200 के करीब अधिकारियांे ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में प्रदेश को जहरमुक्त करने का आंदोलन बल पकड़ रहा है यह अपने आप में सराहनीय है।
कृषि मंत्री ने कहा कि पर्यावरण और इस खेती से उगने वाला अनाज रसायनमुक्त होता है। इस कृषि पद्धति में देसी गाय, पारंपरिक देसी बीजों का संरक्षण पर बल दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती अपना चुके किसानांे के लिए बड़े फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को देसी नस्ल की गाय मुहैया करवाने के लिए पाॅलिसी तैयार कर ली गई है और जून माह में किसानों को गाय मुहैया करवाना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस खेती विधि के बारे में नौणी और पालमपुर विश्वविद्यालयों में शोध का कार्य किया जाएगा।
कार्यशाला में प्रधान सचिव कृषि ओंकार शर्मा, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के राज्य परियोजना निदेशक राकेश कंवर, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक डाॅ. राजेश्वर सिंह चंदेल, कृषि निदेशक देशराज शर्मा, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वाइस चांसलर डाॅ एचसी शर्मा, जिला उपायुक्त सोलन विनोद कुमार, एसपी सोलन मधुसूदन और सभी जिलों के कृषि विभाग के पीडी, डीपीडी, एसएमएस, एटीएम और बीटीएम और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
