15 दिनों से ट्रिपिंग और लंबे बिजली कटों से उद्योग प्रभावित, अध्यक्ष वाई.एस. गुलेरिया बोले—पहले प्रदेश के उद्योगों की जरूरतें पूरी करे सरकार
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बद्दी। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और अनियोजित शटडाउन को लेकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीबीएनआईए) ने गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष वाई.एस. गुलेरिया ने कहा कि पिछले करीब 15 दिनों से औद्योगिक इकाइयां बिजली आपूर्ति की समस्या से जूझ रही हैं। रोजाना 50 से 70 मेगावाट तक बिजली की कटौती और घंटों तक बिजली बंद रहने से उत्पादन कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उद्योगों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध करवाने की मांग की है।
बीबीएनआईए के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को बिजली सरप्लस राज्य माना जाता है। इसी भरोसे पर कई उद्योगों ने बिजली की लागत और आपूर्ति की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं। लेकिन मौजूदा हालात में बार-बार बिजली गुल होने, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और लंबे समय तक अनिर्धारित कटौती से उद्योगों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
एसोसिएशन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। बिजली संकट को लेकर बीबीएनआईए ने अपने पदाधिकारियों की आपात बैठक भी आयोजित की, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों ने उत्पादन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।
बिजली कटौती से उत्पादन और मशीनरी को नुकसान
बीबीएनआईए अध्यक्ष वाई.एस. गुलेरिया ने कहा कि लगातार बिजली बाधित होने से उद्योगों को कई तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उत्पादन प्रक्रिया के बीच बिजली बंद होने से तैयार हो रहे बैच खराब होने का खतरा रहता है। इससे कच्चे माल की बर्बादी, उत्पादन दोबारा शुरू करने का अतिरिक्त खर्च और निर्धारित समय पर ऑर्डर की आपूर्ति करने में कठिनाइयां पैदा होती हैं।
उन्होंने कहा कि बार-बार लाइन ट्रिपिंग से महंगी औद्योगिक मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसके अलावा बिजली की कमी पूरी करने के लिए डीजल जनरेटर चलाने पड़ते हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बढ़ती लागत और उत्पादन में रुकावट उद्योगों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
बिजली निर्यात से पहले स्थानीय उद्योगों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग
बीबीएनआईए ने हिमाचल प्रदेश सरकार के केरल को 600 मेगावाट बिजली निर्यात करने के हालिया फैसले को लेकर भी चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि इस बिजली निर्यात का मौजूदा संकट से संबंध है, तो सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बिजली से राजस्व अर्जित करना सरकार का व्यावसायिक निर्णय हो सकता है, लेकिन प्रदेश के उद्योगों की जरूरतों और उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
वाई.एस. गुलेरिया ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूसरे राज्यों को बिजली देने से पहले हिमाचल के घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इनसे सरकार को बिजली शुल्क और जीएसटी के रूप में राजस्व मिलता है, जबकि रोजगार सृजन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलता है। यदि उद्योग बिजली संकट के कारण प्रभावित होते हैं, तो इसका नुकसान पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ सकता है।
पुराने सब-स्टेशनों और बिजली नेटवर्क में सुधार जरूरी
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक शैलेश अग्रवाल ने कहा कि बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र के कई सब-स्टेशन पहले से ही ओवरलोड हैं और बिजली वितरण का बुनियादी ढांचा भी पुराना हो चुका है। इसे आधुनिक बनाने और बढ़ती औद्योगिक मांग के अनुरूप क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने तीन से चार नए सब-स्टेशनों को मंजूरी दी है, लेकिन उनके निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं होने के कारण परियोजनाओं में प्रगति प्रभावित हो रही है। ऐसे में मौजूदा सब-स्टेशनों पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने नए सब-स्टेशनों के निर्माण के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने और बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बीबीएनआईए ने सरकार के समक्ष रखीं चार प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) से चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता: दूसरे राज्यों को बिजली निर्यात करने से पहले प्रदेश के औद्योगिक उपभोक्ताओं की जरूरतों, विशेषकर अधिक मांग वाले समय में, पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
2. बिजली नेटवर्क का तत्काल ऑडिट: बार-बार होने वाली लाइन ट्रिपिंग की समस्या दूर करने के लिए फीडर लाइनों, सब-स्टेशनों और ट्रांसमिशन नेटवर्क की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
3. पारदर्शी बिजली आवंटन नीति: बिजली के वितरण के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए, ताकि प्रदेश की वास्तविक मांग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके।
4. नियमित संवाद व्यवस्था: बिजली कटौती, मांग के आकलन और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार, एचपीएसईबीएल और मान्यता प्राप्त औद्योगिक संगठनों के बीच नियमित बैठक एवं संवाद की व्यवस्था स्थापित की जाए।
उद्योगों को सुरक्षित बिजली आपूर्ति देना सरकार की प्राथमिकता हो
बीबीएनआईए अध्यक्ष वाई.एस. गुलेरिया ने कहा कि एसोसिएशन का उद्देश्य प्रदेश की वास्तविक सरप्लस बिजली से राजस्व अर्जित करने के सरकार के प्रयासों का विरोध करना नहीं है। एसोसिएशन चाहता है कि बिजली निर्यात से पहले प्रदेश की जरूरतों का सही आकलन किया जाए और केवल वास्तविक अतिरिक्त बिजली ही दूसरे राज्यों को भेजी जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से आग्रह किया कि वे इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लें और एचपीएसईबीएल को औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने, अनियोजित कटौती रोकने तथा पुराने बिजली ढांचे को मजबूत करने के निर्देश दें।
गुलेरिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उत्पादित बिजली का लाभ सबसे पहले प्रदेश की आर्थिक तरक्की, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को मिलना चाहिए। बीबीएन जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता बनाए रख सकें और प्रदेश निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना रहे।














